हर साल 3 दिसंबर को अंतरार्ष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाया जाता है। ये मात्र एक दिन नहीं है। ये जरिया है उन लोगों के साथ भेदभाव की भावना को जड़ से खत्म करने का जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं। अस्ल में हमें और आपको समझने की कोशिश करनी होगी कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है। हमे बिना भेदभाव के उनके जीवन में सहारा देने की अलख जगानी होगी जिससे वो भी समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर बेहतर काम कर सके। भारत में दिव्यांगों के लिये राष्ट्रीय नीति होने के बावजूद दिव्यांगों की स्थिति दुनिया के अन्य देशों की तुलना में थोड़ी दयनीय नजर आती है। हम जाने अनजाने में ही सही कई बार दिव्यांगों को प्रेरित करने की जगह हतोत्साहित कर देते है। कई बार हमने देखा है कि दिव्यांगों के लिए क्षमतानुसार कौशल प्रशिक्षण जैसी योजनाओं के होने के बावजूद जागरूकता के अभाव में दिव्यांग आबादी का एक बड़ा हिस्सा ताउम्र बेरोजगार रह जाता है। अगर उन्हें शिक्षित कर सृजनात्मक कार्यों की ओर मोड़ा जाय तो वो भी राष्ट्रीय संपत्ति की वृद्धि में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं। आज विशेष के इस अंक में जानने की कोशिश करेंगे कि अंतरार्ष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाने के पीछे उद्देश्य क्या है, इसमे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका क्या है, भारत में दिव्यांगों की स्थिति कैसी है और दिव्यांगों के लिये राष्ट्रीय नीति क्या कहती है और इसमे कब कब संशोधन हुआ है Anchor - Ghanshyam Upadhyay
Producer - Rajeev Kumar, Ritu Kumar, Abhilasha Pathak
Production - Akash Popli
Reporter - Bharat Singh Diwakar
Graphics - Nirdesh, Girish, Mayank, Akash Popli
Video Editor - Rama Shankar, Saif Khan, Pitamber Joshi

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